chathi maiya puja

छठ पूजा 2026: पूजा सामग्री सूची, नहाय-खाय, खरना और अर्घ्य की पूरी तैयारी

छठ पूजा आते ही घरों में एक अलग ही रौनक दिखाई देने लगती है। कहीं गेहूँ साफ करके सुखाया जा रहा होता है, कहीं ठेकुआ बनाने की तैयारी चलती है, तो कहीं बाँस का सूप, दउरा, नारियल, गन्ना और मौसमी फल जुटाए जा रहे होते हैं। घर की महिलाएँ और पुरुष मिलकर पूजा की तैयारी करते हैं। बच्चे भी इस माहौल का हिस्सा बनते हैं। घाटों की सफाई से लेकर प्रसाद बनाने तक, हर काम में श्रद्धा और अनुशासन दिखाई देता है।

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ महापर्व का विशेष महत्व है। लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर, देवरिया, बलिया, वाराणसी, पटना और आसपास के अनेक क्षेत्रों में भी श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ छठी मैया और सूर्य देव की उपासना करते हैं। जो परिवार कामकाज के कारण अपने मूल गाँव से दूर रहते हैं, वे भी शहरों में घाटों, तालाबों, नदी के किनारों या उपयुक्त घरेलू व्यवस्था के माध्यम से इस पर्व को मनाते हैं।

लेकिन छठ की तैयारी में एक छोटी-सी उलझन अक्सर सामने आती है। आखिर कौन-सी सामग्री जरूरी है? सूप और दउरा कितने लेने चाहिए? ठेकुआ और खरना का प्रसाद कब बनता है? अर्घ्य के लिए कौन-से फल रखे जाते हैं? और पूजा की सामग्री में कौन-सी वस्तुएँ सामान्य पूजन के लिए हैं, जबकि कौन-सी विशेष रूप से छठ की परंपरा से जुड़ी हैं?

इस लेख में छठ पूजा 2026 की तारीखों से लेकर नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य तक की तैयारी विस्तार से समझाई गई है। साथ ही, पूजा सामग्री की विस्तृत सूची, प्रसाद की तैयारी, सूप-दउरा की व्यवस्था और लखनऊ तथा उत्तर प्रदेश के शहरी परिवारों के लिए उपयोगी सुझाव भी दिए गए हैं।

1. छठ पूजा 2026 कब है? चारों दिनों की तारीख जानिए

वर्ष 2026 में छठ पूजा का चार दिवसीय पर्व शुक्रवार, 13 नवंबर से सोमवार, 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। इसकी मुख्य पूजा रविवार, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य के साथ होगी। अगले दिन, सोमवार, 16 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाएगा।

चारों दिनों का सामान्य कार्यक्रम इस प्रकार है।

13 नवंबर, शुक्रवार: नहाय-खाय। इस दिन घर की साफ-सफाई और शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। व्रती स्नान करके पूजा की तैयारी करते हैं और अपनी परंपरा के अनुसार सात्त्विक भोजन ग्रहण करते हैं। कई परिवारों में कद्दू-भात का विशेष महत्व है।

14 नवंबर, शनिवार: खरना। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को परंपरा के अनुसार खरना का प्रसाद ग्रहण करते हैं। कई घरों में गुड़ की खीर और रोटी बनाई जाती है। इसके बाद कठिन व्रत का अगला चरण शुरू होता है।

15 नवंबर, रविवार: संध्या अर्घ्य। इस दिन अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूप और दउरा में फल, ठेकुआ, नारियल, गन्ना और अन्य पारंपरिक प्रसाद सजाकर घाट पर ले जाए जाते हैं। सूर्यास्त के समय अर्घ्य देने की तैयारी पहले से की जाती है।

16 नवंबर, सोमवार: उषा अर्घ्य और पारण। सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा पूरी होने के बाद परिवार की परंपरा और व्रती के नियमों के अनुसार पारण किया जाता है।

अर्घ्य का सही समय हर शहर में एक जैसा नहीं होता, क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होता है। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और पटना में समय अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय स्थानीय पूजा आयोजन की जानकारी से समय की पुष्टि करें।

2. छठ पूजा की पूरी सामग्री सूची: खरीदारी से पहले यह सूची जाँचें

छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को अलग-अलग हिस्सों में बाँटकर जुटाना अधिक सुविधाजनक रहता है। एक ही बार में सब कुछ खरीदने के बजाय पहले बर्तन और पूजा की वस्तुएँ, फिर फल और प्रसाद, और अंत में अर्घ्य के दिन की ताजा सामग्री तैयार की जा सकती है।

सूप और दउरा: बाँस का सूप, बाँस का दउरा या टोकरी, जरूरत के अनुसार अतिरिक्त टोकरी, फल और प्रसाद रखने के लिए स्वच्छ कपड़ा तथा सामग्री ढकने के लिए उपयुक्त साफ कपड़ा।

पारंपरिक प्रसाद: ठेकुआ, चावल के लड्डू या स्थानीय परंपरा में प्रचलित चावल से बने प्रसाद, गुड़, गेहूँ का आटा, चावल, घी या अपनी पारिवारिक विधि में इस्तेमाल होने वाली सामग्री।

फल और अर्घ्य की सामग्री: नारियल, केला, गन्ना, मौसमी फल, नींबू या स्थानीय परंपरा में इस्तेमाल होने वाले खट्टे फल, शकरकंद, हल्दी की गाँठ और अन्य पारंपरिक सामग्री। फल क्षेत्र, उपलब्धता और परिवार की रीति के अनुसार अलग हो सकते हैं।

खरना की तैयारी: चावल, दूध, गुड़, रोटी बनाने के लिए आटा और भोजन पकाने के लिए आवश्यक बर्तन। कुछ परिवार खरना के प्रसाद में विशेष प्रकार की खीर या रोटी बनाते हैं। सामग्री उसी विधि के अनुसार जुटाएँ जो आपके घर में प्रचलित है।

पूजा के लिए सामान्य सामग्री: स्वच्छ जल, अर्घ्य देने के लिए उपयुक्त पात्र, दीपक, रूई की बाती, घी या तेल, धूप, कपूर, फूल और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य वस्तुएँ, यदि वे आपके परिवार की परंपरा में शामिल हों।

सफाई और व्यवस्था: पूजा के बर्तन साफ करने की सामग्री, स्वच्छ कपड़े, प्रसाद रखने के साफ पात्र, पानी ले जाने के लिए सुरक्षित बर्तन और घाट तक सामग्री पहुँचाने की व्यवस्था।

ध्यान रखें कि छठ पूजा की मुख्य पहचान उसके पारंपरिक प्रसाद, सूप-दउरा, सूर्य को अर्घ्य और व्रत के अनुशासन से जुड़ी है। सामान्य पूजा सामग्री जैसे धूप, कपूर और बाती सहायक हो सकती हैं, लेकिन वे छठ के विशेष प्रसाद और अर्घ्य की सामग्री का स्थान नहीं लेतीं।

3. बाँस का सूप और दउरा: छठ पूजा में इनका क्या महत्व है?

छठ पूजा की तैयारी में बाँस के सूप और दउरा का विशेष स्थान है। कई घरों में पूजा की सामग्री इन्हीं में सजाकर घाट तक ले जाई जाती है। सूप में फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद व्यवस्थित किए जाते हैं, जबकि दउरा में एक साथ अधिक सामग्री रखी जा सकती है। इनके इस्तेमाल की व्यवस्था परिवार की परंपरा, व्रत करने वाले सदस्यों और प्रसाद की मात्रा के अनुसार बदलती है।

सूप खरीदते समय उसकी बुनावट और मजबूती देख लें। बाँस की पट्टियाँ बहुत ढीली हों या किनारे टूटे हुए हों, तो उसमें फल और प्रसाद ले जाना कठिन हो सकता है। सूप इतना बड़ा हो कि उसमें आवश्यक सामग्री आराम से रखी जा सके, लेकिन इतना भारी भी न हो कि उसे उठाकर ले जाने में परेशानी हो।

दउरा की संख्या तय करने से पहले यह देख लें कि कितने व्रती हैं और कितने लोगों के लिए प्रसाद तैयार किया जा रहा है। किसी परिवार को एक बड़ी टोकरी पर्याप्त लग सकती है, जबकि दूसरे परिवार को सामग्री अलग-अलग रखने के लिए कई टोकरियों की जरूरत हो सकती है। एक ही संख्या को सभी घरों के लिए नियम मानना उचित नहीं है।

सूप और दउरा को इस्तेमाल करने से पहले साफ और सूखी जगह पर रखें। यदि खरीदने के बाद उनमें धूल लगी हो, तो परिवार की परंपरा के अनुरूप उन्हें साफ करके सुखा लें। सामग्री रखते समय भारी फल नीचे और नाजुक फल ऊपर रखने से दबने या खराब होने की आशंका कम होती है।

शहरों में रहने वाले परिवारों के लिए एक अतिरिक्त बात उपयोगी है। यदि पूजा स्थल तक पैदल जाना है या भीड़ वाले घाट पर पहुँचना है, तो टोकरी में उतनी ही सामग्री रखें जितनी आसानी से उठाई जा सके। बहुत अधिक सामान एक ही टोकरी में भरने से रास्ते में संतुलन बिगड़ सकता है।

4. छठ पूजा के फल, गन्ना और पारंपरिक अर्घ्य सामग्री

छठ पूजा में फल और अन्य पारंपरिक प्रसाद बहुत सोच-समझकर जुटाए जाते हैं। कई परिवारों में केला, नारियल, गन्ना, शकरकंद, मौसमी फल, नींबू या स्थानीय रूप से प्रचलित अन्य फल अर्घ्य की सामग्री में शामिल होते हैं। कौन-सा फल रखा जाएगा, इसकी सूची क्षेत्र, मौसम और परिवार की रीति के अनुसार बदल सकती है।

केले के घौद या गुच्छे को कई परिवार सूप-दउरा में प्रमुखता से रखते हैं। नारियल भी अनेक घरों में पारंपरिक अर्घ्य सामग्री का हिस्सा होता है। गन्ने का उपयोग कुछ क्षेत्रों में विशेष महत्व रखता है और पूजा स्थल की सजावट या प्रसाद की व्यवस्था में भी शामिल किया जा सकता है।

फल खरीदते समय उनकी ताजगी देखें। बहुत अधिक पके हुए या दबे हुए फल घाट तक पहुँचने से पहले खराब हो सकते हैं। दूसरी ओर, कच्चे फल भी प्रसाद के लिए उपयुक्त न हों, यह संभव है। इसलिए ऐसी सामग्री चुनें जो पूजा के समय तक ठीक स्थिति में रहे।

यदि आप बाजार से कई प्रकार के फल खरीद रहे हैं, तो उन्हें पूजा की सामग्री से अलग साफ जगह पर रखें। अर्घ्य से पहले सूप में फल सजाते समय ध्यान दें कि वे एक-दूसरे के दबाव से खराब न हों। नारियल या गन्ने जैसी बड़ी वस्तुओं के लिए अलग जगह रखना उपयोगी हो सकता है।

किसी भी सूची को सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नियम न समझें। छठ की परंपराएँ घर-घर में कुछ अलग हो सकती हैं। अपने परिवार के बुजुर्गों से पूछ लेना उपयोगी रहता है कि कौन-सी सामग्री हर साल रखी जाती है और किस वस्तु का विशेष महत्व है।

5. ठेकुआ और खरना का प्रसाद: तैयारी कैसे करें?

छठ पूजा की चर्चा हो और ठेकुआ का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है। गेहूँ के आटे, गुड़ या चीनी और परिवार की विधि के अनुसार इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री से तैयार ठेकुआ अनेक घरों में छठ का प्रिय पारंपरिक प्रसाद है। इसकी खुशबू और स्वाद कई लोगों के लिए बचपन, गाँव और परिवार के साथ बिताए त्योहारों की याद भी लेकर आते हैं।

ठेकुआ बनाने की तैयारी में सबसे पहले आवश्यक सामग्री की मात्रा तय करें। कितने सूप सजाने हैं, परिवार में कितने सदस्य हैं और प्रसाद कितने लोगों में बाँटना है, यह सोचकर आटा, गुड़ और अन्य सामग्री जुटाई जा सकती है। प्रसाद की मात्रा बहुत कम पड़ने से बचने के लिए थोड़ी अतिरिक्त तैयारी उपयोगी हो सकती है, लेकिन जरूरत से बहुत अधिक बनाना भी जरूरी नहीं है।

कुछ परिवार गेहूँ को साफ करके घर में ही पिसवाते हैं या प्रसाद के लिए अलग आटा रखते हैं। कुछ जगहों पर ठेकुआ बनाने के लिए खास साँचे इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि कई घरों में हाथ से आकार दिया जाता है। बनाने का तरीका परिवार की परंपरा और उपलब्ध साधनों के अनुसार अलग हो सकता है।

खरना के प्रसाद में कई परिवार गुड़ की खीर और रोटी बनाते हैं। कुछ स्थानों पर इसे रसियाव या इसी तरह के स्थानीय नामों से भी जाना जाता है। प्रसाद बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन और सामग्री पहले से साफ करके अलग रख देना सुविधाजनक रहता है। खरना की तैयारी व्रत करने वाले व्यक्ति की पारिवारिक विधि के अनुसार की जानी चाहिए।

छठ के प्रसाद की तैयारी में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। प्रसाद बनाने की जगह साफ रखें, सामग्री को धूल और अनावश्यक संपर्क से बचाएँ और तैयार प्रसाद को स्वच्छ पात्र में रखें। यदि परिवार में कोई विशेष नियम है, तो उसी का पालन करें।

6. नहाय-खाय: पहले दिन की तैयारी और जरूरी बातें

नहाय-खाय छठ पूजा के चार दिवसीय पर्व का पहला दिन है। इस दिन घर की सफाई, स्नान, रसोई की तैयारी और सात्त्विक भोजन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कई परिवारों में इस दिन कद्दू-भात बनाया जाता है। इसके साथ दाल या अन्य भोजन भी घर की परंपरा के अनुसार तैयार किया जा सकता है।

नहाय-खाय से पहले रसोई और भोजन बनाने की जगह साफ कर लेना उपयोगी रहता है। चावल, दाल, कद्दू और अन्य जरूरी सामग्री पहले से जुटा लें। यदि भोजन किसी खास बर्तन में बनाया जाता है, तो उसे भी साफ करके तैयार रखें। घर के सदस्य मिलकर सफाई और तैयारी में सहयोग कर सकते हैं।

कद्दू-भात की विधि अलग-अलग घरों में कुछ बदल सकती है। इसलिए अपने परिवार में जो तरीका प्रचलित है, उसे प्राथमिकता दें। भोजन बनाने में जल्दबाजी से बचने के लिए सामग्री और समय का अनुमान पहले ही लगा लें।

नहाय-खाय को केवल भोजन का दिन समझना सही नहीं होगा। यह आने वाले दिनों के अनुशासन और तैयारी की शुरुआत भी है। घर में प्रसाद बनाने के लिए जगह तय करना, सूप-दउरा की व्यवस्था देखना और अर्घ्य की सामग्री की सूची बनाना इसी दिन से शुरू किया जा सकता है।

यदि परिवार के कुछ सदस्य शहर से बाहर से आ रहे हैं, तो उनके पहुँचने और आवश्यक सामग्री जुटाने की योजना भी बना लें। इससे खरना और अर्घ्य के दिनों में भागदौड़ कम होगी।

7. खरना: गुड़ की खीर, रोटी और व्रत की तैयारी

छठ पूजा के दूसरे दिन खरना मनाया जाता है। इसे कुछ स्थानों पर लोहंडा भी कहा जाता है। इस दिन व्रती अपनी परंपरा के अनुसार दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद खरना का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद छठ व्रत का कठिन चरण शुरू होता है, जिसमें कई व्रती उषा अर्घ्य तक निर्जला उपवास रखते हैं।

खरना के प्रसाद में गुड़ की खीर और रोटी अनेक परिवारों में प्रमुख होती है। प्रसाद बनाने के लिए चावल, गुड़, दूध और आटे जैसी सामग्री जुटाई जा सकती है। कुछ परिवारों में प्रसाद बनाने की विधि, पात्र और रसोई से जुड़े विशेष नियम होते हैं। इन नियमों का पालन अपने परिवार की परंपरा के अनुसार करना चाहिए।

खरना की तैयारी के लिए रसोई का काम समय से शुरू करना उपयोगी रहता है। यदि कई लोगों के लिए प्रसाद बनना है, तो सामग्री की मात्रा पहले तय कर लें। प्रसाद रखने के लिए साफ पात्र तैयार रखें और परिवार के सदस्यों को काम बाँट दें, ताकि व्रती को अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े।

खरना के बाद व्रत के नियमों को लेकर अलग-अलग परिवारों में अनुशासन और परंपराएँ हो सकती हैं। किसी व्यक्ति की सेहत, उम्र या दवा की जरूरत को नज़रअंदाज़ करके कठोर उपवास करने का दबाव नहीं डालना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी चिंता होने पर पहले चिकित्सकीय सलाह लें और अपनी स्थिति के अनुसार निर्णय करें।

इस दिन शाम के बाद संध्या अर्घ्य की सामग्री की अंतिम सूची भी देखी जा सकती है। फल, गन्ना, सूप-दउरा, ठेकुआ और अन्य पारंपरिक प्रसाद में जो कमी हो, उसे समय रहते पूरा कर लें।

8. संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी

छठ पूजा का तीसरा दिन अनेक परिवारों के लिए सबसे व्यस्त और भावनात्मक समय होता है। शाम को व्रती और परिवार के सदस्य सूप-दउरा में प्रसाद सजाकर घाट की ओर जाते हैं। नदी, तालाब या निर्धारित पूजा स्थल पर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। घाटों पर लोकगीत, छठी मैया के गीत और परिवारों की सामूहिक उपस्थिति वातावरण को विशेष बना देती है।

संध्या अर्घ्य के लिए सामग्री पहले से सजाकर रखना उपयोगी है। सूप में ठेकुआ, फल, नारियल और परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य प्रसाद रखें। गन्ना या बड़ी वस्तुओं को अलग से ले जाना हो, तो उसकी व्यवस्था करें। अर्घ्य के लिए जल या दूध का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, यह अपनी पारिवारिक विधि के अनुसार तय करें।

घाट तक जाने का समय पहले से सोच लें। यदि आप लखनऊ या किसी दूसरे शहर में सार्वजनिक घाट पर जा रहे हैं, तो भीड़, पार्किंग, रास्ते और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों की जानकारी ले लें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ जा रहे हों, तो उनके लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करें।

अर्घ्य का समय स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार तय किया जाता है। किसी दूसरे शहर की समय-सारणी देखकर अपने स्थान पर वही समय मान लेना उचित नहीं है। पूजा के दिन अपने शहर के स्थानीय पंचांग या आयोजन समिति की सूचना की पुष्टि करें।

घाट पर स्वच्छता का ध्यान रखें। प्लास्टिक और कचरा जल में न डालें। पूजा सामग्री या प्रसाद के अवशेषों को स्थानीय व्यवस्था के अनुसार निपटाएँ। यदि जल में उतरना हो, तो गहराई और फिसलन का ध्यान रखें और बच्चों को बिना निगरानी पानी के पास न जाने दें।

9. उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य और पारण की तैयारी

छठ पूजा का चौथा दिन उषा अर्घ्य का होता है। सुबह सूर्य उदय होने से पहले परिवार के सदस्य पूजा की सामग्री लेकर घाट या निर्धारित स्थान पर पहुँचते हैं। व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और उसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करते हैं। इसी के साथ चार दिनों के छठ महापर्व का समापन होता है।

सुबह की तैयारी के लिए रात में ही आवश्यक सामग्री एक जगह रख दें। सूप-दउरा, प्रसाद, फल, नारियल, गन्ना और अर्घ्य के लिए आवश्यक पात्र तैयार हों, तो सुबह जल्दबाजी कम होगी। कपड़े और आवागमन की व्यवस्था भी पहले से तय कर लेना उपयोगी रहता है।

उषा अर्घ्य का समय सूर्योदय पर आधारित होता है। लखनऊ, पटना, वाराणसी और अन्य शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय समय की पुष्टि करें और यात्रा में लगने वाला समय भी ध्यान में रखें।

पारण की विधि और समय परिवार की परंपरा के अनुसार हो सकते हैं। व्रती को उपवास समाप्त करने के लिए किसी दूसरे परिवार की विधि का दबाव नहीं दिया जाना चाहिए। लंबे उपवास के बाद शरीर की स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि कमजोरी, चक्कर, बेहोशी या अन्य गंभीर लक्षण हों, तो तुरंत उचित चिकित्सकीय सहायता लें।

छठ का समापन केवल पूजा की सामग्री समेटने तक सीमित नहीं है। यह परिवार के साथ समय बिताने, प्रसाद बाँटने और पर्व के अनुभव को साझा करने का भी अवसर है। घाट से लौटने के बाद घर की सफाई और बर्तनों को व्यवस्थित करने के लिए परिवार के सदस्य मिलकर काम कर सकते हैं।

10. लखनऊ और उत्तर प्रदेश के शहरों में छठ पूजा की तैयारी

छठ पूजा की परंपरा बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से गहराई से जुड़ी है, लेकिन आज यह देश के अनेक शहरों में मनाई जाती है। लखनऊ में भी ऐसे परिवार हैं जिनकी जड़ें बिहार, पूर्वांचल या आसपास के क्षेत्रों में हैं। नौकरी, पढ़ाई और व्यापार के कारण अपने मूल गाँव से दूर रहने वाले लोग भी इस पर्व को पूरी श्रद्धा से मनाने की कोशिश करते हैं।

शहर में रहने वाले परिवारों के लिए सबसे पहले यह तय करना उपयोगी है कि पूजा कहाँ होगी। कुछ लोग नदी या तालाब के घाट पर जाते हैं, कुछ सार्वजनिक रूप से आयोजित छठ घाट चुनते हैं, और कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार घर में सीमित व्यवस्था करते हैं। स्थान चुनते समय स्थानीय नियम, सुरक्षा और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखना चाहिए।

यदि सार्वजनिक घाट पर जाना है, तो स्थानीय प्रशासन या आयोजन समिति की जानकारी पहले से देख लें। रास्ते बंद होने, भीड़, पार्किंग और सुविधाओं में बदलाव हो सकता है। पूजा के दिन की योजना पुराने साल की सूचना पर आधारित न रखें।

घर में पूजा की व्यवस्था करने वाले परिवारों को भी परंपरा के अनुसार आवश्यक सामग्री की सूची बनानी चाहिए। छोटे स्थान पर सामग्री व्यवस्थित रखने के लिए सूप-दउरा और प्रसाद के पात्र पहले से तय कर लें। यदि पानी का पात्र या कृत्रिम जल व्यवस्था इस्तेमाल की जा रही है, तो उसे सुरक्षित, स्थिर और साफ जगह पर रखें।

शहर में सामग्री खरीदते समय बाँस का सूप, दउरा, ठेकुआ के लिए सामग्री और पारंपरिक फल जैसी चीजें पहले जुटाना उपयोगी हो सकता है। सामान्य पूजा सामग्री जैसे धूप, कपूर या बाती की जरूरत हो, तो उसकी उपलब्धता भी जाँच लें। लेकिन ध्यान रखें कि छठ की विशिष्ट सामग्री और पारंपरिक प्रसाद ही तैयारी का केंद्र बने रहें।

11. छठ पूजा की सामग्री ऑनलाइन खरीदते समय क्या देखें?

आज कई परिवार छठ पूजा की कुछ सामग्री ऑनलाइन मँगाना पसंद करते हैं, खासकर जब कामकाज के कारण बाजार जाने का समय कम मिलता है। ऑनलाइन खरीदारी में सुविधा हो सकती है, लेकिन उत्पाद विवरण ध्यान से पढ़ना जरूरी है। केवल “पूजा सामग्री” या “पूजा किट” लिखे होने से यह न मानें कि उसमें छठ के लिए जरूरी सभी वस्तुएँ शामिल होंगी।

छठ पूजा की विशेष सामग्री में बाँस का सूप, दउरा, ठेकुआ और फल जैसी वस्तुएँ शामिल हो सकती हैं। ये चीजें स्थानीय बाजार से लेना कई परिवारों के लिए अधिक सुविधाजनक होता है, खासकर जब आकार, ताजगी या पारंपरिक पसंद के अनुसार चयन करना हो। फल और प्रसाद की सामग्री खरीदते समय उनकी गुणवत्ता और उपयोग की तारीख पर ध्यान दें।

ऑनलाइन उपलब्ध सामान्य पूजा सामग्री में धूप, कपूर, रूई की बाती या अन्य पूजन वस्तुएँ शामिल हो सकती हैं। यदि आपके परिवार की पूजा विधि में इनकी जरूरत है, तो उत्पाद का विवरण, पैक की मात्रा, कीमत और डिलीवरी की तारीख जाँचें। छठ की मुख्य सामग्री के विकल्प के रूप में सामान्य पूजा किट पर निर्भर न रहें।

AyodhyaShri पर उपलब्ध पूजा और हवन सामग्री को अपनी जरूरत के अनुसार देखा जा सकता है। खरीदने से पहले वर्तमान उपलब्धता, पैक में शामिल वस्तुओं और उत्पाद विवरण की पुष्टि करें। किसी उत्पाद को छठ पूजा के लिए अनिवार्य बताने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह वास्तव में आपके उपयोग के अनुकूल है।

सबसे अच्छा तरीका यह है कि पारंपरिक प्रसाद और ताजी सामग्री की व्यवस्था स्थानीय रूप से करें, जबकि जिन सामान्य पूजन वस्तुओं की जरूरत हो उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार खरीदें। इससे खर्च और तैयारी दोनों पर बेहतर नियंत्रण रहता है।

12. छठ पूजा में होने वाली आम गलतियाँ और उनसे बचने के तरीके

छठ पूजा की तैयारी में सबसे आम परेशानी सामग्री की सूची अधूरी रह जाना है। कभी सूप तो आ जाता है, लेकिन दउरा की व्यवस्था नहीं होती; कभी प्रसाद के लिए गुड़ या आटा कम पड़ जाता है; और कभी फल खरीदने का काम अंतिम समय तक टल जाता है। इससे बचने के लिए चारों दिनों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग सूची बना लें।

दूसरी आम चूक यह है कि सामान्य पूजा सामग्री और छठ की विशिष्ट सामग्री को एक ही समझ लिया जाता है। धूप, कपूर और बाती सामान्य पूजन में उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन वे ठेकुआ, फल, सूप-दउरा और अर्घ्य की पारंपरिक सामग्री का स्थान नहीं लेते। खरीदारी की सूची में दोनों श्रेणियों को अलग रखें।

तीसरी परेशानी आवागमन और समय की योजना न बनाना है। सार्वजनिक घाट पर भीड़ हो सकती है और कुछ रास्तों पर यातायात प्रतिबंध भी लग सकते हैं। इसलिए स्थानीय व्यवस्था की जानकारी पहले से लें और बच्चों तथा बुजुर्गों के साथ यात्रा करते समय अतिरिक्त समय रखें।

चौथी बात प्रसाद की स्वच्छता से जुड़ी है। प्रसाद बनाने की जगह साफ रखें, तैयार सामग्री को धूल से बचाएँ और फल व अन्य वस्तुओं को साफ पात्र में रखें। पूजा स्थल पर कचरा न फैलाएँ और जल स्रोतों को साफ रखने का ध्यान रखें।

पाँचवीं और सबसे जरूरी बात व्रती के स्वास्थ्य से जुड़ी है। छठ का व्रत कई लोगों के लिए कठिन हो सकता है। किसी व्यक्ति को बिना उसकी शारीरिक स्थिति समझे उपवास के लिए बाध्य न करें। यदि किसी को बीमारी, गर्भावस्था, दवा की जरूरत या लंबे उपवास से जुड़ी स्वास्थ्य चिंता है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। श्रद्धा के साथ स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

13. छठ पूजा 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: छठ पूजा 2026 कब है?

छठ पूजा 2026 का चार दिवसीय पर्व 13 नवंबर से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। नहाय-खाय शुक्रवार, 13 नवंबर को, खरना शनिवार, 14 नवंबर को, संध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर को और उषा अर्घ्य सोमवार, 16 नवंबर को होगा। यह तारीखें भारत में प्रचलित पंचांग के अनुसार हैं। अर्घ्य का सटीक समय अपने शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार जाँचें।

प्रश्न 2: छठ पूजा के लिए कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?

सामान्य रूप से बाँस का सूप, दउरा, ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना और परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य प्रसाद की व्यवस्था की जाती है। खरना के लिए चावल, गुड़, दूध और रोटी बनाने की सामग्री की जरूरत हो सकती है। अर्घ्य के लिए जल और उपयुक्त पात्र भी तैयार रखें। धूप, कपूर और बाती जैसी सामान्य पूजन सामग्री का इस्तेमाल परिवार की विधि के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन इन्हें छठ के पारंपरिक प्रसाद का विकल्प न समझें।

प्रश्न 3: नहाय-खाय में क्या बनाया जाता है?

नहाय-खाय के दिन कई परिवारों में कद्दू-भात बनाया जाता है। इसके साथ दाल या अन्य सात्त्विक भोजन भी घर की परंपरा के अनुसार तैयार किया जा सकता है। इस दिन घर की सफाई, स्नान और भोजन की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। भोजन की विधि और सामग्री परिवार तथा क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।

प्रश्न 4: खरना में कौन-सा प्रसाद बनाया जाता है?

खरना में कई परिवार गुड़ की खीर और रोटी बनाते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस प्रसाद को रसियाव या स्थानीय नामों से भी जाना जाता है। प्रसाद बनाने के लिए चावल, दूध, गुड़ और आटे जैसी सामग्री की जरूरत हो सकती है। सही विधि परिवार की परंपरा के अनुसार अपनाएँ और प्रसाद बनाने के लिए साफ बर्तन तथा स्वच्छ स्थान का इस्तेमाल करें।

प्रश्न 5: छठ पूजा में ठेकुआ क्यों बनाया जाता है?

ठेकुआ छठ पूजा से जुड़ा एक प्रसिद्ध पारंपरिक प्रसाद है। अनेक परिवार इसे गेहूँ के आटे, गुड़ या चीनी और अपनी विधि के अनुसार अन्य सामग्री से तैयार करते हैं। इसे सूप में रखकर अर्घ्य के समय ले जाया जाता है और बाद में प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है। ठेकुआ बनाने की विधि और स्वाद घर-घर में अलग हो सकते हैं, इसलिए परिवार में प्रचलित तरीके को प्राथमिकता दें।

प्रश्न 6: क्या छठ पूजा में बाँस का सूप और दउरा जरूरी हैं?

बाँस का सूप और दउरा छठ पूजा की पारंपरिक सामग्री में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। कई परिवार इनमें फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद सजाकर अर्घ्य के लिए ले जाते हैं। इनकी संख्या परिवार की परंपरा, व्रत करने वालों और प्रसाद की मात्रा के अनुसार बदल सकती है। खरीदते समय मजबूती, आकार और सामग्री ले जाने की सुविधा पर ध्यान दें।

प्रश्न 7: छठ पूजा में संध्या और उषा अर्घ्य का समय क्या है?

संध्या अर्घ्य 15 नवंबर 2026 को सूर्यास्त के समय और उषा अर्घ्य 16 नवंबर को सूर्योदय के समय दिया जाएगा। सटीक समय शहर के अनुसार बदलता है। लखनऊ का समय पटना या वाराणसी के समय से अलग हो सकता है, इसलिए किसी दूसरे शहर का समय अपने स्थान पर लागू न मानें। पूजा से पहले स्थानीय पंचांग या आयोजन समिति की ताजा जानकारी की पुष्टि करें।

प्रश्न 8: क्या छठ पूजा की सामग्री ऑनलाइन खरीदी जा सकती है?

हाँ, सामान्य पूजा सामग्री जैसे धूप, कपूर और रूई की बाती ऑनलाइन खरीदी जा सकती है, यदि वे आपकी पारिवारिक पूजा विधि में इस्तेमाल होती हैं। लेकिन छठ के लिए आवश्यक सूप-दउरा, ठेकुआ और ताजे फल जैसी सामग्री की व्यवस्था अलग से करनी पड़ सकती है। ऑनलाइन खरीदते समय उत्पाद विवरण, मात्रा, कीमत और डिलीवरी तारीख जाँचें। किसी सामान्य पूजा किट को छठ की संपूर्ण सामग्री मानकर खरीदने से पहले उसमें शामिल वस्तुओं की सूची जरूर पढ़ें।

14. छठ पूजा की तैयारी श्रद्धा, स्वच्छता और सही योजना के साथ करें

छठ महापर्व में तैयारी का हर चरण मायने रखता है। नहाय-खाय से शुरू होकर खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य तक परिवार के सदस्य मिलकर काम करते हैं। प्रसाद बनाने से लेकर सूप-दउरा सजाने और घाट तक पहुँचने तक, हर काम में अनुशासन और आपसी सहयोग की जरूरत होती है।

यदि सामग्री की सूची पहले से तैयार हो, तो अंतिम समय की भागदौड़ कम हो सकती है। सबसे पहले अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार आवश्यक वस्तुएँ तय करें। फिर सूप-दउरा, फल, प्रसाद की सामग्री और अर्घ्य की व्यवस्था अलग-अलग जाँचें। सामान्य पूजन सामग्री की जरूरत हो तो उसे भी समय रहते जुटा लें।

लखनऊ और उत्तर प्रदेश के शहरों में रहने वाले परिवारों के लिए स्थानीय घाट की व्यवस्था, आवागमन और अर्घ्य का समय पहले से देख लेना विशेष रूप से उपयोगी है। पूजा स्थल पर स्वच्छता बनाए रखें, जल स्रोतों को गंदा न करें और बच्चों तथा बुजुर्गों की सुरक्षा का ध्यान रखें।

AyodhyaShri पर उपलब्ध सामान्य पूजा और हवन सामग्री को अपनी जरूरत के अनुसार देखा जा सकता है। हालांकि, छठ पूजा की विशिष्ट सामग्री और पारंपरिक प्रसाद की व्यवस्था अपनी पारिवारिक रीति तथा स्थानीय उपलब्धता के अनुसार अलग से करें।

छठी मैया और सूर्य देव से प्रार्थना है कि सभी परिवारों में सुख, स्वास्थ्य, शांति और मंगल बना रहे। छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।


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